नई टीवी एंकर की नई चूत-1

अन्तर्वासना के सभी पाठक पाठिकाओं को चूतनिवास के लंड का इकत्तीस बार तुनक तुनक के सलाम.
मेरी पिछली कहानी न्यूज़ एंकर की चूत मारी अन्तर्वासना में छपी थी.

इस कहानी में मैंने बताया था कि कैसे एक टीवी स्टार लड़की बेबी रानी को मैंने दिल्ली के मौर्य शेराटन होटल में चोदा था.
कहानी में यह भी बताया गया था कि बेबी रानी की एक सहेली और लेस्बो पार्टनर गुड्डी भी उसके साथ आयी थी.

शुरू में गुड्डी का चुदाई का कोई इरादा नहीं था, लेकिन बेबी रानी को चार बार चुदते देख कर उसको भी ज़ोर की चुदास चढ़ गयी थी. उसको लड़कों से और खासकर चुदाई से बहुत डर लगता था और इसी लिए वो चौबीस या पच्चीस की होकर भी कुंवारी थी. बेबी रानी और एक अन्य सहेली पिंकी से साथ समलैंगिक चुदाई से ही काम चलाया करती थी. जब उसने उग्र कामेच्छा से व्याकुल होकर बेबी रानी के कान में कहा कि उसको भी चुदने की इच्छा हो रही है तब मैंने मामला आगे बढ़ाया.

फिर इसके बाद क्या क्या हुआ वह पढ़िए.

मैं गुड्डी रानी के पैरों की तरफ बैठ गया और सुन्दर से, गोरे गोरे मुलायम से, उन पांवों को हल्के हल्के स्पर्श से सहलाने लगा. बहुत प्यार से अंगूठे और उँगलियों को पोरों को हौले हौले सा दबाया. टखनों पर उंगलियां फिराईं. रानी की आँखों में आँखें डाल के पूछा- अब कैसा लग रहा है जानू … अब तो डर पूरा निकल गया न?
गुड्डी ने धीमी सी आवाज़ में कहा- उस टाइम तो निकल ही गया था मगर अब फिर से मन में शंकाएं उठने लगी हैं … कहीं तू मुझे दग़ा तो नहीं दे देगा … कभी तूने मुझे चोद चाद के त्याग दिया तो? बस यही चिंता सताए जाती है … अब तेरे ऊपर है कि कैसे मेरी चिंता दूर करता है. जब तक मन शांत नहीं होगा तो चुदाई का मज़ा भी नहीं आएगा.

मैंने पूछा- रानी तो बता क्या करूँ तेरी सब शंकाएं दूर करने के लिए?
रानी ने इतरा कर कहा- मैं क्या जानूँ … तुझे मेरी तसल्ली करवानी है तू ही सोच कैसे करेगा… मुझे थोड़ी करनी है जो मुझसे पूछ रहा है.
मैंने कहा- देख रानी, मैं तेरे साथ न तो शादी कर सकता हूँ और न ही स्थायी रूप से तेरे साथ रह सकता हूँ … मैं शादीशुदा हूँ दो बच्चो का बाप हूँ … मेरी पैंतालीस रानियां हैं जिन सबसे तुझे मेरा इश्क़ बाँटना पड़ेगा … लेकिन मैं तुझे कभी धोखा नहीं दूंगा … मेरी सबसे पुरानी रानी है बाली रानी जिसके साथ मेरे सम्बन्ध पैंतीस साल से हैं … दूसरी पुरानी रानी है रेखा रंडी जो चौबीस पच्चीस साल से मेरी रानी है … फिर राशि रानी जिसको भी अट्ठारह उन्नीस साल हो गए … मैं बेबी रानी की इनमें से किसी से बात करवा देता हूँ तेरे सामने … वो तेरे से बात नहीं करेंगी क्यूंकि तू अभी तक चुदी नहीं है … बेबी रानी चुद गई है इसलिए उसके साथ बात हो जायगी स्पीकर ऑन करके … सुन लेना.

बेबी रानी चिढ़ के बोली- मुझे नहीं करनी किसी से बात … इसको चुदना हो चुदे, नहीं तो साली माँ चुदवाये … तू छोड़ इस रंडी को. इसकी किस्मत में अगर ज़िन्दगी भर बिना चुदे रहना ही लिखा है तो कोई क्या कर सकता है.
मैंने कहा- नहीं नहीं बेबी रानी मेरी जान … इसकी तसल्ली तो ज़रूर करवाऊंगा … बहनचोद, चूतनिवास के दरवाज़े से कोई लौंडिया चुदे बिना चली जाए तो धिक्कार है मुझ को.

मैं लगातार गुड्डी के पांवों को सहला रहा था, उँगलियाँ उसके तलवों पर फिसला रहा था. उसका बदन इस प्रकार सहलाने से मिलते आनंद की प्रतिक्रिया देने लगा था. उसके चूतड़ हल्के हल्के से थिरकने लगे थे, जैसे लंड चूत में गया हुआ हो और चूत उस लंड को अपनी समस्त गहराई तक भीतर घुसा लेना चाहती हो.

मुझे यकीन था कि यह हरामज़ादी लाइन पर जल्दी ही आ जायगी. बस थोड़ी सी ज़्यादा मेहनत करनी पड़ेगी.

“सुन गुड्डी, आज तुझे एक बात बताता हूँ जो आज तक किसी रानी को नहीं बताई … करवाचौथ पर सब रानियां मेरे लिए निर्जल उपवास रखती हैं … किसी को बिना बताये मैं भी उस दिन निर्जल व्रत रखता हूँ … सुबह 5 बजे उठकर जूसी रानी और रेखा रंडी को चाय पिलाता हूँ और कुछ मिठाई और फल खिलाता हूँ … फिर दिल में महारानी बेग़म जान के नाम से शुरू करके सब रानियों का एक एक करके नाम लेकर उपवास शुरू करता हूँ. उसके बाद रात चाँद देखने तक रानियां बिना खाये, बिना पानी पिए रहती हैं और मैं भी … जब मेरी प्यारी रानियां बिना खाये पिए हैं तो कुछ भी खाने पीने की वस्तु मेरे हलक़ से कैसे उतर सकती है. इसके सिवा एक और बात सुन ले कमीनी … मैं किसी भी रानी को कितना प्यार करता हूँ यह एक इम्तहान साबित कर देगा … वो टेस्ट तू अभी ले ले और फिर बताना कि मैं तेरे प्यार के लायक हूँ या नहीं … टेस्ट यह है कि मैं आँखों पर पट्टी बांध लेता हूँ.. फिर तुम दोनों एक एक करके मेरे मुंह में चूची दो और मेरे होंठ चूसो … मैं बता दूंगा कि कौनसी चूची किसकी है और यह भी बता दूंगा कि किसने होंठ चूसे … उसके बाद दोनों एक एक करके मुझे थोड़ा सा अमृत पिलाओ … मैं बता दूंगा कि कौनसा अमृत किसका है.”

दोनों लौंडियाँ चौंक गयीं.

बेबी रानी ने कहा- मैं नहीं मानती … पिस इज़ पिस … तू कैसे बता सकता कौनसा अमृत किसने निकाला … हम दोनों की चूचियों का साइज अलग अलग है इसलिए चूची तो तू कुत्ते तू हाथ से फील करके बता देगा.”
गुड्डी रानी ने कहा- हाँ यार है तो न मानने वाली बात … चलो टेस्ट कर ही लेते हैं … साले के हाथ भी बांध देंगे तो कैसे फील करेगा.
मैंने हँसते हुए कहा- ठीक है जान … तुम हाथ भी बांध दो … मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.

अचम्भे से ग्रसित होकर दोनों ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया. आँखों पर बाथरूम से लाकर एक तौलिया रख दिया. हाथ बांधे तो नहीं बल्कि चादर से मुझे गले तक ढक दिया.

उसके बाद एक ने आकर मेरे होठों पर अपने होंठ लगा कर हल्का सा चुम्बन लिया.
मैंने फ़ौरन कहा- गुड्डी रानी.
थोड़ी देर तक एकदम सन्नाटा रहा.

फिर एक चूची मेरे मुंह से आकर लगी. मैंने मुंह खोल कर निप्पल को चूसा. तुरंत ही चूची वापिस हटा ली गयी.
मैंने ज़ोर से हंस कर कहा- यह भी गुड्डी रानी.
फिर कुछ पल सन्नाटा! दोनों रंडियां विश्वास ही नहीं कर पा रही थीं.

तब बेबी रानी ने कहा- सुन गुड्डी इसके मुंह में सूसू करते हैं फिर देखें क्या बताता है यह … सॉरी यार … सुस्सू कह दिया. भूल गई थी इसे अमृत कहना चाहिए था. खोल कुत्ते मुंह.

मैंने आज्ञानुसार मुंह खोल दिया.
दो चार पलों में ही एक चूत ने मुंह के पास आकर दो तीन बूंदें अमृत की टपकाईं. वो चूत हटी तो दूसरी ने आकर मुंह में अमृत धारा डाली. मैंने बता दिया: पहले वाली बेबी रानी की थी और बाद वाली गुड्डी रानी की.

कुछ देर दोनों में कुछ खुसुर पुसुर सी हुई फिर एक जूता मेरे नाक से लगाया गया.
मैंने सूंघा और कहा- यह बिलकुल नया जूता है … कोई अच्छे से पहना हुआ जूता हो तो वो लगाओ … बहनचोद जूते में पांव की सुगंध आने में टाइम लगता है.
जवाब में एक पैर ही मेरे मुंह से लगा दिया गया. मैंने एक पल में कह दिया कि यह बेबी रानी का पैर है.

तौलिया मेरे मुंह से हटा लिया गया. दोनों रानियां आश्चर्य चकित मुझे घूर रही थीं.

मैंने कहा- अब तो मिल गया न सबूत कि मैं अपनी हर रानी को कितना अधिक प्यार करता हूँ … रानी जब मेरे सामने होती है तो मेरी सभी इन्द्रियां, मेरा पूरा ध्यान, मेरा दिमाग और मेरी आत्मा सब रानी पर सौ प्रतिशत नहीं बल्कि एक हज़ार प्रतिशत केंद्रित होती हैं … मुझे दुनिया की बाकी हर बात दिमाग से निकल जाती है … रानी, रानी और सिर्फ रानी ही रानी मेरे सर्वस्व में होती है. रानी से मिलन के समय मैं एक साधना में चला जाता हूँ … तभी तो मैं पहचान सका कि किस रानी की चूची थी, किसके होंठ, किसके पांव और किसका स्वर्ण अमृत … रानी की छोटी से छोटी बात भी मेरे दिमाग के कम्प्यूटर में फाइल हो जाती है … अगर मैं बेइंतेहा प्यार न करता होता तो क्या यह संभव था? संपूर्ण समर्पण का इससे बड़ा प्रूफ क्या हो सकता है? गुड्डी रानी तू खुद ही सोच के बता.

गुड्डी की आँख में आंसू आ गए थे. बेबी रानी की आँखें भी नम थीं.

गुड्डी रानी ने पूछा- मगर राजे तूने मेरे बदन को तो कभी न चूमा, न चूसा था तो फिर तूने मेरा नाम कैसे लिया?
“जान यह तो बहुत आसान सी बात है … मैंने तेरा स्वाद नहीं लिया मगर बेबी रानी का तो लिया था … जो स्वाद उसका नहीं था वह ख़ुदबख़ुद तेरा ही हुआ न … है न सिंपल? हा हा हा”

गुड्डी रानी मुहसे लिपट गयी- राजे क्या बात है! गज़ब सचमुच गज़ब!! सॉरी राजे मैंने तेरे प्यार पर शक़ किया … तू लड़की के साथ संगम को एक साधक जैसे करता है यह बहुत बड़ी बात है. जब रानियां बिना खाये बिना पानी पिए फ़ास्ट रखतीं तो तू भी कुछ नहीं खाता पीता, ये सुन के मेरा दिल भर आया. यह बहुत बड़ी बात है राजे. अब मैं जान गयी कि तेरी इतनी बड़ी रानियों की फ़ौज कैसे बनी … प्लीज़ राजे मसल दे अपनी गुड्डी रानी को … इस कली को फूल बना दे आज … आजा मेरा राजा.

बेबी रानी रुंधे हुए गले से बोली- सच बोली तू गुड्डी. यह करवाचौथ के फ़ास्ट वाली बात से तो मेरा भी दिल भर आया. राजे तू तो एक अनोखा ही आइटम है … तूने यह टेस्ट देकर मुझे भावुक कर दिया … मैं बहुत किस्मत वाली हूँ जो तू मिल गया … कोई झूठा वादा नहीं, कोई चूत के पीछे पागलपन नहीं … मैं सदके जाऊँ तुझ पर राजे.

मैंने कहा- अच्छा अब मेरी तारीफ बंद और चुदाई शुरू. मैं यह सब कुछ बताना नहीं चाहता था और आज तक किसी रानी को बताया भी नहीं, लेकिन गुड्डी रानी की ज़िद ने मजबूर कर दिया. चलो अच्छा ही हुआ इसका मन तो शांत हो गया न … मन में कोई चिंता या तनाव नहीं रहना चाहिए… गुड्डी रानी अब तू देख मेरी जीभ का करिश्मा.

कहानी जारी रहेगी.
चूतनिवास
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