सहेली के पति से जोरदार चुदाई-2

मेरी मेरी वासना की कहानी के पिछले भाग
सहेली के पति से जोरदार चुदाई-1
में अब तक आपने पढ़ा कि मेरी सहेली शेफाली और उसका पति अंकुश स्विमिंग पूल में मस्ती करने लगे थे. उनकी मस्ती देख कर मेरी चुत में चींटियां रेंगने लगी थीं.

अब आगे:

मैं अपनी चुत में कपड़ों के ऊपर से ही उंगलियां फेरते चुत की फांकों को मसलने लगी. शायद इस बात को अंकुश ने देख लिया था.

मुझे उन्हें देखते हुए … और उन दोनों को ऐसे ही मस्ती करते करते टाइम बीत गया और हमारे जाने का टाइम हो गया. हम सब घर आ गए.

घर आकर मैं सोचने लगी कि क्या अंकुश सही कह रहा है कि मुझे दूसरी स्विमिंग ड्रेस ले लेनी चाहिए. हो सकता है कि मैं उसे बिकनी टाइप की ड्रेस में अपनी तरफ आकर्षित कर सकूं और उसका लंड मुझे मिल सके.

मैं कुछ निर्णय नहीं ले पा रही थी … क्योंकि किसी मर्द को उसकी बीवी के सामने अपने वश में कर पाना मुझे एक असम्भव सा काम लगने लगा था.

फिर रोज की तरह मैं और शेफाली स्विमिंग के लिए जाते रहे. अगले रविवार को शेफाली का फोन आया.

शेफाली- रोमा आज फिर से तुम, मैं और अंकुश स्विमिंग के लिए चल रहे हैं. तुम तैयार हो जाओ.

मैंने ओके कहा और तैयार हो गई. मैं रेडी होकर घर के बाहर आकर खड़ी हो गई. कुछ मिनट बाद शेफाली और अंकुश आए, तो मैं कार में बैठ गई. हम सब स्विमिंग इंस्टीट्यूट पहुंचे. शेफाली तो कार से उतर कर जल्दी से अन्दर चली गई.

मैं भी कार से उतरने लगी, तो अंकुश ने मेरा हाथ दबा कर मुझसे रुकने का इशारा किया.

मैं एक पल के लिए चौंक गई मगर रुक गई. शेफाली कार से दूर चली गई थी

तब अंकुश ने कहा- रोमा … मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लेकर आया हूं … ये लो!
मैंने उससे पूछा- ये क्या है?
उसने कहा- गिफ्ट है … चेंजिंग रूम में देख लेना और इसके बारे में शेफाली को मत बताना. अब तुम चलो, मैं कार पार्क करके अभी आता हूं.

उसकी बात सुनकर मैं मन ही मन आनन्दित होते हुए अन्दर आ गई. शेफाली और मैंने देखा कि आज तो पूरा इंस्टीट्यूट खाली खाली लग रहा था. रिसेप्शन पर सिर्फ एक लड़का बैठा था.

मैंने उससे पूछा कि क्यों आज ऐसा क्या हुआ है … पूरा इंस्टीट्यूट खाली क्यों है?
उसने कहा- मैडम आज संडे है न … तो इंस्टीट्यूट खाली ही रहेगा. संडे फैमिली-डे होता है, पर गर्मी के कारण आज कोई फैमिली भी नहीं आई है.

उसकी बात सुनकर हम दोनों आ अन्दर गए. पूल साइड देखा तो उधर पूल में बस एक कपल ही था.

अन्दर शेफाली बोली- ये अंकुश कहां रह गया … अभी तक आया नहीं?
तभी अंकुश भी आ गया और बोला- ये क्या … आज तो पूरा इंस्टीट्यूट ही खाली है.

मैंने उसे बताया कि गर्मी ज्यादा होने से आज ज्यादा कोई आया नहीं.

फिर मैं और शेफाली चेंजिंग रूम में चले गए. अन्दर चेंजिंग रूम में मैंने अपने बैग में से वो पैकेट निकाल कर खोला, तो देखा, उसमें बिकिनी स्टाइल का टू-पीस स्विमिंग सूट था. इसमें ऊपर एक ब्रा थी … और नीचे एक छोटा से पेंटी थी. पैंटी साइड से बंध बंधने वाली थी ठीक वैसी थी, जैसे शेफाली पहनती है.

ये देख कर मैं बहुत खुश हुई और उसे पहन लिया. इसकी पेंटी तो और भी छोटी थी … जो सिर्फ मेरी चूत के एरिया को ही ढक रही थी. मुझे ये पैंटी पहन कर बाहर निकलने में बहुत शर्म भी आ रही थी.

जब चेंजिंग रूम से निकल कर मैं बाहर आई, तो शेफाली ने मुझे देख कर कहा- वाह रोमा … क्या बात है नई स्विमिंग ड्रेस कब ले ली तुमने … मुझे बताया भी नहीं. वैसे काफी सेक्सी लग रही हो इसमें.

तभी अंकुश भी चेंजिंग रूम से निकल कर आया और उसने मुझे देख कर इशारे में ही कहा कि सेक्सी लग रही हो.

मैंने अंकुश से कहा- अब तो मैं इस ड्रेस में फ्लोटिंग कर सकती हूं न!
उसने कहा- हां क्यों नहीं.
मैंने कहा- तो चलो … अब मुझे सिखाओ.

हम दोनों पूल में उतरे, तो वो मुझे फ्लोट करना सिखाने लगा. सिखाने के बहाने वो मुझे यहां-वहां टच कर रहा था. इससे मुझे बहुत मजा आ रहा था. तभी एकदम से उसने मेरे मम्मों को पकड़ लिया. उसका हाथ मेरे मम्मों पर पड़ते ही मैं धीमे से चीखी- आऊच!
उसने कहा- सॉरी गलती से टच हो गया.

ऐसे ही हम मस्ती करते रहे. कुछ ही देर में वो जो एक कपल पूल में तैर रहे थे. वो निकल कर चले गए.

अब पूल में हम तीन ही लोग रह गए थे. रिशेप्शन पर वो एक लड़का था. अन्दर पूल तो पूरा खाली था, सिर्फ हम तीनों बहुत मस्ती कर रहे थे, खूब उछल कूद कर रहे थे.

तभी शेफाली बोली- मैं वॉशरूम से होकर अभी आती हूं.

वो उधर वॉशरूम चली गई, इधर पूल में अंकुश और मैं ही रह गए थे.

उसी समय अंकुश मेरे पास आया और उसने मेरी तरफ आते हुए कहा- रोमा, तुम इस बिकनी में बहुत सेक्सी लग रही हो.
ये कहते हुए उसने मेरे गाल पर एक किस कर दिया.
मैं लजा गई.

उसने कहा- कुछ देखना चाहोगी?
मैंने पूछा- क्या?
वो बोला- चलो आओ मेरे पीछे.

मैं उसके पीछे चल दी. वो लेडीज वॉशरूम की तरफ जाने लगा. मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी.

लेडीज वॉशरूम के पास पहुंच कर उसने मुझसे कहा- तुम यहीं बाहर खड़ी रहना … दरवाजा थोड़ा सा खुला रहेगा.

वो अन्दर चला गया, मैं बाहर ही खड़ी रही. फिर मुझे अन्दर से कुछ आवाज आई.

शेफाली- अंकुश ये क्या कर रहे हो, कोई आ जाएगा यार.
अंकुश- कौन आएगा … यहां मेरे तुम्हारे रोमा और रिशेप्शन में जो लड़का बैठा है. हम चारों के अलावा और है ही कौन? वो लड़का तो आएगा नहीं … और रही रोमा, तो मैं उसे कह कर आया हूं कि कोई अगर आए, तो मुझे आवाज दे देना. वैसे भी शेफाली तुम्हें तो पता ही है ना कि मुझे ऐसे एडवेंचर्स का कितना शौक है … तो ये मौका मैं कैसे जाने देता!

शेफाली- अंकुश ये क्या किया तुमने … रोमा क्या सोचेगी हम लोगों के बारे में!
अंकुश- क्या सोचेगी … उसे पता है कि एक हस्बैंड वाइफ ऐसे अकेले में क्या करते हैं. वो इतनी बड़ी तो है कि ये सब अच्छे से समझती है. सच कहूं शेफाली … रोमा को यूं बिकिनी में देख कर मेरा मन चुदाई करना का करने लगा था … इसलिए मैं तुम्हें चोदने के लिए चला आया.

मैं बाहर खड़े होकर उनकी ये बातें सुन रही थी और अन्दर झांकने की कोशिश कर रही थी.

शेफाली- अच्छा जी … तो माय डियर हस्बैंड को चुदाई करनी है … तो ठीक है लो कर लो.

मैंने अन्दर झांक कर देखा, तो दोनों एक दूसरे के ऊपर टूट पड़े थे. मुझे शेफाली का सिर्फ पिछवाड़ा ही दिखाई दे रहा था. जबकि अंकुश का चेहरा मेरी तरफ था. दोनों एक दूसरे को बेतहाशा किस किए जा रहे थे.

फिर अंकुश ने शेफाली की ब्रा की डोरी खोल दी और कहने लगा- तुम्हारे ये मम्मे कितने टाइट हो गए हैं.

वो शेफाली के मम्मों को चूसने लगा, तो शेफाली सिसकारियां लेने लगी. शेफाली का हाथ शायद अंकुश के लंड पर था, इसलिए शायद वो ये कह रहा था कि आह जानू ऐसे ही करते रहो … बहुत मजा आ रहा है.

फिर शेफाली नीचे बैठी. अब शायद वो अंकुश का लंड चूसने वाली थी. यही हुआ … शेफाली ने अंकुश का लंड अपने मुँह में ले लिया और लंड चूसने लगी. मैं ये सब दरवाजे से अन्दर झांक कर देख रही थी.

तभी अंकुश ने मेरी तरफ देखा कि मैं ये सब देख रही हूं. वो मुझे इशारे करते हुए मुस्कुराने लगा.

शेफाली- जानू प्लीज़ अब मत तड़पाओ … जल्दी से डाल दो अपना लंड मेरी चूत में. … आह बुझा दो मेरी प्यास.
अंकुश- इतनी जल्दी भी क्या है जान … थोड़ा सब्र करो … और मजा आएगा.

फिर अंकुश ने शेफाली को वॉशबेसिन के प्लेटफार्म पर बिठा दिया और उसकी टांगें चौड़ी करके उसकी चूत चाटने लगा. शेफाली अपनी कमर उठा कर अंकुश का मुँह अपनी चूत में घुसा रही थी. मुझको तो ये सब एक सपने जैसा लग रहा था.

कुछ देर चूत चाटने के बाद अंकुश ने अपना लंड शेफाली की चूत में डाल दिया तो शेफाली और तड़पने लगी.

अब पूरा वॉशरूम शेफाली की सिसकारियों से गूंज रहा था.
वो मादक आवाजों में बोल रही थी- आह … जल्दी से अन्दर करो … मुझे अब न तड़पाओ … आहहह हहह ऊऊआह..
अंकुश- जानू तैयार हो जाओ … अब मैं अपना लंड जोर से तुम्हारी चूत में पेलने वाला हूँ.
शेफाली- हां पेलो न … मैं कब से तैयार हूं.

अंकुश ने एक झटके में अपना लंड शेफाली की चूत में पूरा घुसा दिया और शेफाली चीख पड़ी. अंकुश लंड पेलने के बाद तेज झटके देने लगा.

अंकुश- मजा आ रहा है जान!
शेफाली- आआहह … उऊऊह … आआह … हां आ रहा है.
अंकुश- और जोर से अन्दर डालूं?
शेफाली- हां डालो.

अंकुश जोर जोर से झटके देने लगा और बीच बीच में शेफाली के मम्मों भी चूसता जा रहा था.

पूरे जोश में था अंकुश … वो शेफाली को गंदी गंदी ग़ालियां भी दे रहा था- ले साली रंडी … मेरा पूरा लंड अपनी चूत में ले … चुद मेरे लंड से साली … बहन की लौड़ी मादरचोद आओहह आअहह …
अंकुश की गर्म आवाजें सुन कर तो मैं शॉक्ड हो गई. इतना जेंटलमेन टाइप दिखने वाला और इंग्लिश बोलने वाला आदमी … अचानक हिंदी में इतनी गालियां कैसे देने लगा.

अंकुश और शेफाली की चुदाई देख कर तो मैं भी गर्म हो गई थी और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया था.

कुछ देर बाद अंकुश बोला- जान … मैं झड़ने वाला हूँ … आंह..
शेफाली- उफ़ … ठीक है … सारा माल अन्दर ही निकाल दो.

फिर अंकुश ने शायद अपना सारा माल शेफाली की चूत में ही छोड़ दिया. अंकुश हांफ रहा था, उसने अपनी अंडरवियर को पहनते हुए लंड के ऊपर किया और बाहर आने लगा.

मैं बाहर ही खड़ी थी. शेफाली अन्दर ही थी. वो अपनी चूत साफ कर रही थी.

बाहर आकर अंकुश मुझसे बोला- कैसी लगी तुम्हें … मेरी ओर शेफाली की ये चुदाई … मजा आया देख कर! लगता है तुम्हारी चूत भी गीली हो गई होगी … हुई या नहीं … सच सच बताना.
मैंने झुकी नजरों में अपना सर हां में हिला दिया.

उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया.
मैं कहने लगी- ये क्या कर रहे हो … छोड़ो मुझे.

पर वो कहां छोड़ने वाला था. वो मुझे उठा कर पूल की तरफ ले गया.

मैंने उससे पूछा- तुम तो एकदम जेन्टलमैन की तरह दिखते हो … और ज्यादातर इंग्लिश में ही बात करते हो … तो फिर ये हिंदी गालियां कहां से सीख लीं!

वो हंस कर कहने लगा- ये हिंदी गालियां हिंदुस्तान के हर मर्द को आती ही होंगी … और वैसे भी चुदाई का असली मजा तो हिंदी टॉकिंग और इन हिंदी गालियों के साथ ही आता है.

फिर उसने मुझे पूल में फेंक दिया. इतने में शेफाली भी आ गई, पर वो मुझसे नज़रें चुरा रही थी. हमने और थोड़ी पूल में मस्ती की.

अब शाम होने लगी थी, तो मैं बोली- चलो अब हमें चलना चाहिए.
हम सब घर आ गए.

अगले दिन से मैं ओर शेफाली हमेशा की तरह ही स्विमिंग के लिए जा रहे थे, पर शेफाली मुझसे अभी भी नज़र चुरा रही थी.

मैंने उससे पूछा- क्या हुए शेफाली … कल से तुम कुछ अलग बिहेव कर रही हो.
वो बोली- क्या कहूँ यार … कल वाशरूम में अंकुश ने मेरी चुदाई की, शायद ये बात तुम जानती हो. बस मैं यही सोच रही हूं कि न जाने तुम हम दोनों के बारे में क्या सोच रही होगी.
मैंने कहा- शेफाली मैं कुछ नहीं सोच रही हूं. तुम दोनों हस्बैंड वाइफ हो … और रही बात चुदाई की, तो ये तो हर कोई करता है. इतनी परेशान मत हो.

वो मेरी बात से सामान्य हो गई.

देखते ही देखते ये हफ्ता भी गुजर गया.

फिर से संडे आ गया. मैं बहुत एक्ससाइटेड थी कि शायद इस संडे भी कुछ नया होगा. स्विमिंग जाने का टाइम हो गया था, पर शेफाली और अंकुश अभी तक नहीं आए थे.

मैंने शेफाली को फ़ोन किया, तो उसने कहा कि आज उसकी 3 बजे एक किटी पार्टी है. आज हम स्विमिंग के लिए नहीं जाएंगे.

ये सुनकर मैं बहुत निराश हो गई.

फिर करीब 15-20 मिनट बाद शेफाली का मैसेज आया.

शेफाली का मैसेज- हैलो रोमा.
मैं- हैलो शेफाली.
शेफाली- रोमा मेरी किटी पार्टी कैंसिल हो गई है … और स्विमिंग के लिए भी हम लेट हो गए हैं.
मैं- हम्म्म्म..

शेफाली- रोमा एक काम करो, तुम मेरे घर आ जाओ. आज हम शॉपिंग के लिए चलते हैं. बहुत दिन हो गए, मैंने शॉपिंग नहीं की है.
मैं- ठीक है, कितने बजे तक चलेंगे!
शेफाली- तुम 3:30 बजे तक आ जाओ.
मैं- पर मैं आज तक तुम्हारे घर नहीं आई हूं. मुझे तो तुम्हारे घर का एड्रेस भी नहीं पता है.
शेफाली- मैं अंकुश को भेज देती हूं. वो तुम्हें ले आएगा.
मैं- ठीक है.

शेफाली के इस मैसेज ने मुझमें एक नई जान सी फूंक दी थी. मैं आज अंकुश के साथ मस्ती की कहानी को आगे बढ़ता देखना चाहती थी.

आप मेरी वासना की कहानी पढ़ते रहिए और मेल करना न भूलिएगा.
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कहानी जारी है.