कुंवारी बुर को चोदने का सोभाग्य-2

यह कहानी एक सीरीज़ का हिस्सा है:

कुंवारी बुर को चोदने का सोभाग्य-1

कुंवारी बुर को चोदने का सोभाग्य-3


अंजलि कुंवारी है… यह सोच कर ही मेरा लंड बेकाबू हो रहा था. उसे तो अब बस बुर चाहिये थी!

मेरे सामने उसका नया नया यौवन से परिपूर्ण बदन खुला हुआ था. अंजलि के चेहरे पर अलग ही कशिश झलक रही थी उसके कुंवारे होंठ जिसको अभी तक किसी लड़के ने नहीं पिया था, मैं जी भर के पी रहा था.
उसकी उभरी चिकनी चुची और उसके चूचुकों के गोले छोटे से काले घेरे, सपाट पेट, और पतली कमर जिसको अभी तक किसी ने भी नहीं चखा था, मैं जम कर चख रहा था और बार बार मैं अंजलि को चूमने लगा.

एक बार तो मन तो हुआ कि इसको ना चोदूँ, ऐसे ही काम चला लूँ, पर अपने लंड का क्या करता जिसने आज पहली बार अंजलि के इस शानदार जिस्म का दीदार किया था.

मैं उसकी चुची को मुँह में भर कर चूसने लगा.
‘उफ्फ्फ आउच धीरे.. बहुत समय है हमारे पास… आह्ह…’

कभी एक चूसता तो कभी दूसरी चुची चूसता, कभी एक हाथ से निप्पल मसल देता तो अंजलि कराह उठती, उफ्फ्फ आअह्ह्ह करने लगती…
चूस चूस कर लाल कर दी थी अंजलि की चुची… कई जगह निशान से पड़ गए थे.

इधर अंजलि भी पीछे नहीं थी, उसके हाथ में मेरा लंड था, वो उसको मसल रही थी, आगे पीछे कर रही थी, लंड पूरा तना हुआ खड़ा था अपनी ड्यूटी को निभाने को तत्पर!

अंजलि- आपका ये तो बहुत मस्त है लगता नहीं कि आपकी उम्र हो गई है!
मैं- क्यों तुमने पहले किसी का देखा है?
‘हाँ, पिक्स में और पोर्न में देखा है..’ अंजलि बोली.
मैं- यह मेरी रोज़ की कसरत का कमाल है.

उसकी पेंटी उतारी तो देखा कि बहुत हल्के हल्के बाल थे लव ट्रैंगल पर… काली बुर तो बहुत देखी थी पर कमसिन गोरी बुर बहुत सालों के बाद देखी थी..
हल्का गुलाबीपन लिए सफ़ेद से मलाई जैसी उभरी और दो लिप्स के बीच हल्की से दरार और उसमें से बहता हल्का सा लिसलिसा पानी.
उसकी बुर गीली थी… अनायास ही झुक कर उसकी बुर को चूम लिया.. मेरे चूमते ही अंजलि एक बारगी उछल सी गई… आअह्ह्ह उम्म्ह… अहह… हय… याह… उफ्फ आह्ह…

फिर मैंने उसकी दोनों टांगों को पकड़ कर फैला दिया और दोनों टांगों की घुटनों को मोड़ कर उसकी चुची के पास ले गया झुक के उसकी बुर के दरार में अपनी जीभ फेरी.. बुर एकदम से उभर कर आ गई जैसे मुझे बुला रही हो, कह रही हो ‘आ आकर मुझे चाट लो खा लो समां जाओ…’

ये सुखद पल अगर कोई महसूस कर सकता है तो बस सिर्फ वो… जो इस पहली बार का मजा लिया हो!

मैंने हल्के से अंजलि की बुर पर हाथ रखा, क्या गजब का एहसास था! घुंघराले बालों में उंगलियाँ फेरते हुए जब मैंने कोमल की भगनासा को छुआ ही था कि अंजलि की सिसकारी निकली आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… अह हहा हहह!
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मुझे लग गया कि यही वो अंग है अंजलि का जो सबसे ज्यादा संवेदनशील है, और अंजलि को पागल बनाने के लिए पर्याप्त है अंजलि की सांसों को बेकाबू कर देगी भगनासा!
भगनासा को छेड़ने की वजह से अबकी बार अंजलि की आवाज भी बदल गई थी.

मैंने अंजलि की बुर के दोनों होंठों को फैलाया और अंदर का भाग नजर आया, बिल्कुल गुलाबी हल्के गुलाबी रंग का, उफ्फ्फफ्फ्फ़ क्या नज़ारा था… और बुर को चाटने का मेरा मन किया।
और फिर अपनी जीभ अंजलि की बुर पर छुआ दी हल्के से!
अंजलि तड़प उठी, वो ना चाहते हुए भी नीचे से बुर को ऊपर को उठाने लगी आह्ह्हह्ह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओ किशोर पागल कर दिया तुमने.. और चूसो.. आहह्ह आह..!

मुझे अपनी जीभ पर हल्का सा नमकीन सा स्वाद का अहसास हुआ, ऐसा स्वाद जिसमें कुंवारेपन की खुशबू थी, शहद सा मीठापन था.
मैंने फिर से जीभ को बुर की लकीर पर फिराया… फिर वही अहसास और फिर फिराता ही चला गया, सपर सपर करके चाटता ही चला गया, अपनी जीभ को नुकीला करके लकीर के अंदर तक चुभा चुभा के चाटता चला गया…

और अंजलि सिर्फ पागल हो रही थी ‘आआ आह्ह… स्स स्साआअह्ह… म्म म्म्माआआह्ह… ओह येस … ओह येस् आ…ह आआआ… हम्म हुम्म्म, स्स्स्स्स स्साआ अह्ह्ह… म्म्म म्म्माआआह्ह… ओह येस… ओह येस… ओह येस… ओह येस किशोर सक इट… ओह येस किशोर सक इट!
कब किशोर अंकल से किशोर पर आ गई पता ही नहीं चला.

मैंने बुर के लबों को फैला कर हल्के गुलाबी छेद में अपनी जीभ डाल दी… ये अंजलि बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने अपने पहले सम्भोग का पहला चरमत्कर्ष प्राप्त कर लिया, मुझको अपनी टांगों से दबा लिया, हाथों से मेरे सर को बुर में दबा दिया मचल कर उछल कर शांत हो गई..
वो लम्बी लम्बी सांसें ले रही थी… मैंने उसकी आँखों में देखा, वहाँ सिर्फ वासना ही दिखाई दे रही थी, आंखें लाल थी, बाल बिखरे थे, चुची पर लाल लाल निशान थे.

मेरे अंदर इतना जोश था कि दिल कर रहा था कि अभी इसकी बुर में लंड डाल दू पर गर मैं ऐसा करता तो मेरा वीर्य तुरंत या जल्दी निकल जाता, जो मैं नहीं चाहता था.

मैंने उसको लंड चुसाने का मन बनाया, मैं लेट गया और उसके सर को नीचे धकेला, वो नए जमाने की लड़की थी, उसको अंदाज़ा हो गया कि मैं क्या चाहता हूँ, वो नीचे आई और मेरे पैरों पर बैठ कर मेरे लंड को सहलाने लगी, झुक कर मेरे लंड को चूमा और एक बारगी मेरे लंड को मुँह में ले लिया.

‘आअह्ह्ह आह आह आह आह ये ये ये यस यस यस ओह्ह्ह आआह्ह…’

हालाँकि यह उसका पहली बार था, फिर भी वो अपनी पहली कोशिश में ही सफल रही शायद पोर्न फिल्म से सीखा था.

मेरी सिसकारी सी निकल रही थी- आह आह्हः आअह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ ये ये ये आह!

अंजलि मेरा लंड चूसने के साथ ही मेरे सीने पर मेरे निप्पल को भी दो उंगली से मसल रही थी जो पीड़ा के साथ एक करेंट भी पैदा कर रही थी..

कुछ ही पलों में मैं भी नज़दीक आ गया- आआह्ह्ह… स्स्स्स स्साआ अह्ह्ह… म्म्म म्म्माआआह्ह… ओह येस… ओह येस… ओह येस… ओह येस बेबी सक इट… ओह येस बेबी सक इट अंजलि मेरा हो जायेगा!

मेरे चूतड़ भी स्ट्रोक्स लगाने लगे, मैंने उसके मुँह से लंड को निकाला और ढेर सारा अमृत उसके चेहरे और चुची पर निकाल दिया और अपनी सांसों को व्यवस्थित करने लगा.
अंजलि मेरे बगल में आ कर मेरे सीने में सर रख कर लेट गई..
हम दोनों ही अपना एक एक राउंड पूरा कर चुके थे पर…

आगे बढ़ने से पहले एक बार फिर मैंने अंजलि से पूछा- अंजलि, क्या तुम और आगे जाना चाहती हो?
अंजलि ने मेरे तरफ देखा और हल्के से सर हिलाया- यस!
मैं- सोच लो एक बार… कहीं तुम्हारे मन में कोई गिल्ट न आये?
अंजलि- किशोर, मैं सच में आपके साथ करना चाहती हूँ. बहुत दिन से मेरे मन में आपके साथ करने का था, कई बार आपको सोच के खुद से फिंगर किया है… पर आप मेरी तरफ देखते ही नहीं थे, आज मौका मिला है, मैं उसको छोड़ना चाहती… आपको अपने अंदर तक महसूस करना चाहती हूँ.. मैं अपना सब कुछ आपको सौंप देना चाहती हूँ..

मैं- फिर भी तुमको अपनी उम्र के कई दोस्त मिल सकते थे… मेरे साथ ही क्यों?
अंजलि- आप सही कह रहे हो, मिल सकते थे… पर मेरी फ्रेंड्स के अनुभव इतने ख़राब हैं कि मेरा उनके साथ दिल ही नहीं किया. मुझको लगता है कि आप मेच्योर हो, मेरे साथ प्यार से करोगे और फिर मेरे को किसी भी तरह का खतरा भी नहीं है आपसे जो मुझे अपने हमउम्र लड़कों से हो सकता है बदनामी का!

मैं- हम्म!
अंजलि- अब आप हम्म मत करो, जल्दी से मुझे वो सुख दो जो मैं चाहती हूँ आपसे!
कह कर अंजलि मेरे ऊपर लेट कर मेरे निप्पल को चूसने लगी… एक करेंट सा दौड़ा मेरे जिस्म में और असर मेरे लंड पर हुआ… उसने अंगड़ाई ली.

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कहानी जारी रहेगी!