पराये का लंड चूत को भाये

मैं अपने पति के साथ गाँव की शादी में गयी तो पड़ोस के एक घर में रुके. उस घर का मालिक तो मेरी जवानी पर मर मिटा. मेरे पति मेरे साथ थे तो मैं क्या करती?

दोस्तो, आप सबकी मुस्कान सिंह अपनी एक और सच्ची कहानी के साथ आप लोगों के बीच हाजिर है।
मेरी पिछली कहानी
लंड बना सफ़र में हमसफ़र-1
को आप लोगों ने काफी पसंद किया. उसके लिए आप सभी पाठकों का दिल से धन्यवाद।

कहानी पोस्ट होने के बाद मुझे इतने सारे मेल प्राप्त हुए कि सबका जवाब दे पाना मेरे लिए मुश्किल है. उसके लिए मैं माफ़ी चाहती हूँ।

कई लोग मुझसे मेरा नंबर माँगते हैं तो कई मुझसे दोस्ती करना चाहते हैं। पर दोस्तो, मैं ऐसा कुछ नहीं कर सकती। आप अगर मुझे मेल करते है तो उसमें आप मेरी कहानी की कमी बताइये और मैं अपनी कहानी को कैसे और ज्यादा कामुक और उत्तेजक बना सकूँ, ऐसा सुझाव दीजिये।

तो दोस्तो, अब चलते हैं मेरी नयी सेक्सी कहानी की तरफ।

सुखविन्दर जी के साथ मेरा रिश्ता काफी गुप्त और अच्छा चल रहा था। उनके अलावा भी मेरे कई लोगों से रिश्ता हुआ. मगर जो बात सुखविन्दर जी के साथ है वो बाकी में नहीं।
मेरी जिंदगी ऐसी ही चल रही थी।

एक बार हुआ ये कि मेरे मायके की तरफ से एक शादी का निमन्त्रण आया। उसके लिए मुझे और मेरे पति दोनों ही को जाना था। वहां पर दो शादी थी, पहली शादी 11 मई को और दूसरी शादी 18 मई को।
जहाँ पे हमको जाना था वो थोड़ा गाँव का इलाका था। हम लोग 9 मई को वहां पहुंच गए थे, शादी को अभी 2 दिन थे। हम दोनों ही शादी के अन्य कार्यक्रम का आनन्द ले रहे थे।

क्योंकि जिस घर में शादी थी वो काफी छोटा सा घर था इसलिए कुछ मेहमानों के रहने का इन्तजाम दूसरी जगह पर किया गया था।
मगर मेरे और मेरे पति का रहने का प्रबंध कुछ दूर एक घर पर किया गया था। वो घर उस समय खाली ही था, बस एक व्यक्ति ही उस घर में थे। घर के बाकी सदस्य कहीं बाहर गए हुए थे।

जैसा कि मैंने आपको बताया कि पहली शादी 11 मई को थी. उसके बाद मेरे पति वापस जाने वाले थे क्योंकि उनको ज्यादा दिन की छुट्टी नहीं मिली थी। मेरे पति ज्यादातर अन्य रिश्तेदारों के साथ ही समय काट रहे थे और मैं अन्य महिलाओं के साथ शादी के कार्य में व्यस्त रहती।
शाम होते ही मैं उस घर में चली जाती जहाँ पर हम रुके हुए थे।

उस गाँव में ज्यादातर मकान कच्चे थे मगर जिस घर में हम रुके थे वो एक पक्का मकान था और काफी सुख सुविधा युक्त था। वहां के जो मालिक थे वो भी काफी दिलखुश आदमी थे। जल्दी ही हमारे बीच अच्छी जान पहचान हो गई.

शादी के एक दिन पहले की रात मेरे पति सो चुके थे मगर मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं टहलने के लिए ऊपर छत पर चली गई. उस वक्त मैंने केवल नाइटी ही पहनी थी, गर्मी काफी थी इसलिए मैंने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी।

मैं वहां पर टहल ही रही थी की अचानक वहां पर घर के मालिक आ गए और मेरे पास आकर मुझसे बात करने लगे।

उनका नाम किशोर था और वो उस गाव के सरपंच भी थे। उनकी उम्र 45 साल के करीब थी।
काफी देर हम दोनों ही वहां बात करते रहे।

क्योंकि मैंने नाइटी के ऊपर कुछ भी दुपट्टा नहीं डाला हुआ था तो मेरे उभरे हुए दूध काफी आकर्षक दिखाई दे रहे थे। उनकी निगाह बार बार मेरे उभारों पर ही जा रही थी। नाइटी के ऊपर से ही मेरे निप्पल तने हुए दिख रहे थे। इस बात को मैं भी भाम्प गई थी मगर उस वक्त मैं कुछ कर भी नहीं सकती थी।

मैंने भी गौर किया कि उनका पैन्ट भी टाइट हो रहा था। मैं सब कुछ समझ रही थी मगर कर भी क्या सकती थी।

बातों बातों में ही उन्होंने मेरी तारीफ करनी शुरू कर दिया। उनकी बातों से साफ़ पता चल रहा था कि वो मुझे लाइन मार रहे थे, मैं मन ही मन मुस्कुरा रही थी।
काफी देर हम दोनों ने बातें की और उसके बाद मैं बोली- मुझे अब नींद आ रही है, मैं जा रही हूँ.
और मैं वहां से चल दी।
मुझे पता था कि उनकी नजरें मुझे जाते हुए देख रही हैं।

जैसे ही मैं सीढ़ियों तक पहुंची तो पीछे पलट कर उनको देखा. वो मुझे ही देख रहे थे, मैं मुस्कुराई और नीचे उतर गई.
नीचे उतर कर कमरे के अन्दर जाने से पहले मैं फिर पलटी और देखा तो वो सीढ़ी पर से मुझे देख रहे थे।

इस बार उन्होंने मुस्कुराते हुए अपना हाथ हिलाया और मुझे बाय किया। मैंने भी अपना हाथ हिला कर उनको बाय किया और अन्दर चली गई।

इतना तो साफ़ था कि उनका दिल मुझ पर आ चुका था मगर मैं यहाँ दूसरे के घर आई थी इसलिए ऐसा कुछ भी करना सही नहीं होता।
अगले दिन शादी थी, सुबह से ही सब तैयारी में लगे हुए थे। मेरे पति भी काम में व्यस्त थे।

दोपहर को मुझे नहाने के लिए जाना था कोई साथ भी नहीं मिल रहा था, तो मैं अकेली ही वहां चली गई जिस घर में हम रुके थे।

वहां मैंने जाकर अपने कपड़े बदले और गाउन पहन कर बाथरूम चली गई, बाथरूम घर के पीछे के हिस्से में था। मैं वहां नहा कर केवल तौलिया ही लपेट कर वापस आ रही थी. मैंने ध्यान नहीं दिया कि सामने से किशोर जी भी आ रहे हैं।
अचानक से मेरी नज़र उन पर पड़ी, वो मेरे बदन को घूरे जा रहे थे. कमरे में जाने से पहले मैंने पलट कर देखा वो खड़े होकर मुझे ही घूरे जा रहे थे।

अचानक हुई इस घटना से मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था।

फिर मैं तैयार हुई और वहां से निकल गई।

शाम को शादी के लिए सभी लोग तैयार हुए।
मैंने भी एक गुलाबी रंग की अच्छी सी साड़ी पहनी हुई थी, गहने गले का ब्लाउज और कमर से नीचे से साड़ी मुझे बहुत ही सेक्सी लुक दे रहे थे। एक गांव के हिसाब से ये बहुत ही बोल्ड लुक था।

जब मैं पार्टी में गई तो जवान क्या … बूढ़े तक की नज़र मेरे ऊपर से हट नहीं रही थी।

कुछ देर में वहां किशोर जी भी आये और वो भी मुझे ताड़े जा रहे थे। मेरी भी निगाह बार बार उन्हीं की तरफ जा रही थी। उन्हें देख कर ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरे लिए ही वहां पर आये हुए हों।

जब मैं खाना लेने के लिए स्टाल पर गई तो पीछे से मेरे कानों में एक हल्की सी आवाज आई- आज आप बहुत ही खूबसूरत लग रही हो.
मैंने पलट कर देखा तो मेरे बिल्कुल पीछे किशोर जी प्लेट लेकर खड़े थे।
मुस्कुराते हुए मैंने भी जवाब दिया- आप यहाँ मुझे ही देख रहे हैं क्या? और भी तो औरतें हैं यहाँ पर।
उन्होंने जवाब दिया- हैं तो बहुत … मगर आप जैसी सुन्दर कोई नहीं है।
उस वक्त मैंने कुछ नहीं कहा और बस मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गई।

पूरी पार्टी में वो मुझे ही ताड़ते रहे, उनके अलावा भी कुछ लोग मुझे काफी घूर रहे थे।

रात लगभग 12 बज चुके थे. मैंने अपने पति से कहा- चलिये अब चलते हैं क्योंकि मुझे नींद आ रही हैं।
तो उन्होंने कहा- चलो मैं तुम्हें छोड़ कर आ जाता हूँ, मैं कुछ देर से आऊँगा।
और वो मुझे वहां छोड़ आये जहां पर हम रुके हुए थे।

उस वक्त मुझे लौटते देख कर किशोर भी वापस अपने घर आ गए थे मगर मुझे यह बात पता नहीं थी।

मैंने अपने कपड़े बदले और गाउन पहन कर बिस्तर पर लेटी रही. काफी देर तक मुझे नींद नहीं आई तो मैंने छत पर जाने का सोची। और मैं रूम से निकल कर छत पर चली गई।

वहां जाकर देखा तो किशोर पहले से वहां मौजूद थे। मैंने उनसे पूछा- आपको भी नींद नहीं आ रही क्या?
“नहीं … कैसे आ सकती है? मैं आपको ही याद कर रहा था।”
“क्यों? मुझे किस लिए?”
“पता नहीं क्यों!” ऐसा कहते हुए उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया।

मैं एकदम से उनकी तरफ देखती हुई बोली- ये क्या कर रहे हैं?
“कुछ नहीं … क्या मैं आपका हाथ भी नहीं पकड़ सकता?”

दोस्तो … उस वक्त मेरे मन में पहली बार उनके प्रति वासना की भावना पैदा हुई। अब मैंने भी उनसे अपना हाथ नहीं छुड़ाया. वो मुझे देखते हुए मेरे हाथ को सहलाने लगे। बार बार वो मेरी तारीफ किये जा रहे थे।

बातों ही बातों में मैंने उनको बता दिया- मेरे पति कल यहाँ से चले जायेंगे मगर मैं अभी 20 तारीख तक यहाँ रुकने वाली हूँ।
ऐसा सुन कर तो जैसे उनकी बांछें खिल उठी।

अब उनको इतना तो पता लग गया था कि मैं किसी तरह का विरोध नहीं करुँगी और उन्होंने मेरे हाथ को अपने होंठों से चूम लिया।
मैंने तुरंत हाथ छुड़ाते हुए कहा- ऐसा कुछ मत करिए. किसी ने देख लिया तो बहुत दिक्कत हो जाएगी।

उन्होंने मेरे हाथ पकड़ते हुए मुझे छत के कोने में दीवार से सटा दिया और मेरे चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ते हुए बोले- तुम मुझे बहुत अच्छी लगी. तुम जैसी औरत से क्या मैं दोस्ती कर सकता हूँ?
मैंने कहा- दोस्त तो बन सकती हूँ मगर किसी को ये बात पता नहीं लगनी चाहिए।

उन्होंने तुरन्त ही जवाब दिया- कभी किसी को कुछ पता नहीं चलने दूँगा।
और अपने होंठ मेरे होंठों पे लगा दिए।
काफी देर तक हम दोनों ने एक दूसरे को किस किया।

और उन्होंने जब अपना हाथ मेरे गाउन के अन्दर डालना चाहा तो मैंने उन्हें रोक दिया- नहीं नहीं … अभी ये सब नहीं। इसके लिए आज समय नहीं है।
तो उन्होंने मुझसे कहा- जब तुम्हारे पति कल चले जायेंगे तो क्या तुम यहीं सोने आओगी?
मैंने हां कह दिया।

तब उन्होंने मुझे अपनी बांहों से आज़ाद कर दिया। और मैं अपने कमरे में चली गयी।

दोस्तो, इसके आगे क्या हुआ? क्या हम दोनों मिल पाए और क्या क्या हुआ हम दोनों के बीच … ये सब आप कहानी के अगले हिस्से में पढ़ेंगे.

मेरी सेक्सी कहानी आपको कैसी लग रही है? और मैं अपनी गर्म कहानी को और कामुक कैसे बना सकती हूँ, अपनी राय आप मुझे मेल करके जरूर बतायें।
धन्यवाद.
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कहानी का अगला भाग: गैर मर्द के लंड का सुख-2