दोस्त की सेक्सी बहन को पटक पटक के चोदा

सभी सेक्स की देवियों और हवस के पुजारियों को मेरा वासना भरा प्रणाम। इसे आप कोई काल्पनिक कहानी मानकर या फिर कोई मनघढंत किस्सा समझकर कतई न पढ़ें ये एक सच्ची घटना है जिसे रोचक बनाकर मैं आपके सामने पेश कर रहा हूँ। मेरा नाम हर्ष है और मैं भोपाल का रहने वाला हूँ.

बात आज से लगभग 5-6 साल पुरानी है. उस वक्त मेरा लण्ड 6.5 इंच लम्बा और 2 इंच मोटा था. आज भी जब मैं मेरे दोस्त की बहन के साथ की गई उस चुदाई के बारे में सोचता हूँ तो मेरा लंड ऐसे खड़ा हो जाता है मानो कह रहा हो कि ले चलो मुझे उस लड़की के पास और घुसा दो उसकी चूत में.

दोस्तों, क्या बताऊँ उसकी चूत इतनी टेस्टी थी कि अगर आप मेरी जगह होते तो घण्टों उसकी चूत ही चाटते. मैंने भी उसकी चूत बहुत देर तक चाटी थी. सुर्ख गुलाबी झांटों वाली कोमल चूत. ज्यादा ना पकाते हुए अब सीधा कहानी पर आते हैं.

11th में मेरा एक दोस्त था कमल. उसका घर स्कूल के रास्ते में ही पढ़ता था तो रोज स्कूल जाते समय मैं उसके घर जाता था उसको पिक करने और वहीं से हम दोनों साथ स्कूल जाते थे. कमल की बहन निकिता की उम्र कुछ 19 साल रही होगी. देखने में एकदम माल थी.

मैं जब भी कमल के घर जाता तो वह चाय लाती थी और चाय का कप लेते वक्त अक्सर उसका हाथ मेरे हाथ को छू जाता और मेरे सारे बदन में करंट दौड़ जाता. उसके हाथ का करंट मेरे हाथ से होता हुआ मेरे लण्ड तक जाता और मेरा लण्ड खड़ा हो जाता. मैं उसे चोदने के सपने देखा करता था.

इस तरह वो मेरे सपनों की रानी थी और इसी रानी की चूत को फावड़े समान मेरे लण्ड से खोदना मेरी ख़्वाहिश थी. दोस्तों, कई लोग होते हैं जिन्हें लड़की की गाँड आकर्षित करती है कई को लड़की के बोबे आकर्षित करते हैं तो कइयों को लड़की का फिगर आकर्षित करता है.

मुझे किसी भी लड़की का चेहरा बहुत आकर्षित करता है. लड़की के चेहरे पर लिखा होता है कि ये सेक्स की देवी है और इसकी पूजा करना तो बनता है. निकिता का चेहरा इतना सेक्सी था कि जब भी मैं उसके घर अपने दोस्त कमल को बुलाने जाता तो उसका चेहरा देख कर ही मेरा जी मचलने लगता और मेरा मन उसे चोदने का होने लगता.

हम सब की लाइफ में एक ऐसी लड़की जरूर होती है जिसे देखते ही उसे चोदने का मन होने लगता है. उसे देखते ही लगता है कि इसे यहीं पटक कर नंगी करके चोद दिया जाए. कमल का घर ज्यादा बड़ा था नहीं. केवल दो ही कमरे थे. एक हॉल जैसा था जिसमें पलंग बिछा हुआ था और कोने में गैस चूल्हा और कुछ बर्तन रखे हुए थे मतलब वही उनकी किचिन थी.

पापा थे नहीं, मम्मी आंगनबाड़ी में कार्यकर्ता थीं और जिस वक्त मैं कमल के घर जाता था तो उस वक्त वो घर पर नहीं होती थीं. एक बार ऐसे ही रोज की तरह मैं कमल के घर गया तो निकिता ने बताया कि भइया अभी नहा रहा है आप बैठ जाओ मैं चाय लाती हूँ. वो चाय बनाने बैठ गई.

मैं उसी कमरे में पलंग पर बैठा हुआ था. निकिता को उस समय अपनी चुनरी का ध्यान नहीं रहा कि उसने चुनरी नहीं डाली हुई है. उसकी चुनरी पलंग पर मेरे ही बगल में पड़ी हुई थी. जब वो चाय बना रही थी तो उसके बूब्स दुकान के मुहाने पर टँगे सामानों की तरह हिल रहे थे जो ग्राहकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं.

उसके बूब्स इतने बड़े थे कि मेरे मुँह में पानी आ रहा था. मेरा मन उन्हें मसल-मसल कर निचोड़ने का कर रहा था पर मैं अभी ऐसा नहीं कर सकता था. जब किसी को चोदने का बहुत मन हो लेकिन उसे चोद ना सकने की मजबूरी से हाथ बंधे हों तो बहुत बुरा लगता है.

निकिता का ध्यान इस ओर गया ही नहीं कि उसने चुनरी नहीं पहनी है और उसके बाहर को झाँकते बूब्स के दुर्लभ दर्शन मुझे इतने पास से देखने को मिल रहे हैं. सचमें, उस वक्त निकिता मुझे सेक्स की देवी जैसी दिख रही थी. मैंने गौर किया कि निकिता नें सलवार के अंदर कोई ब्रा या कोई बनियान नहीं पहनी है.

उसकी चूचियों का आकार सलवार के बाहर से ही साफ दिखाई दे रहा था. अनायास ही मेरा हाथ अपने लण्ड पर चला गया जो निकिता की चूत में घुस जाने को बेताब हो रहा था. मैं लण्ड को शांत करने का विफल प्रयास कर ही रहा था कि इतने में निकिता ने मुझे उसके बूब्स को निहारते हुए लण्ड पर हाथ मसलते देख लिया.

वो एकदम सकपका गई और तभी उसका ध्यान अपने बूब्स पर गया जो उस वक्त बिना चुनरी और बिना ब्रा के सलवार के अंदर से ही हिमालय के किसी पहाड़ से भी बड़े लग रहे थे. चुनरी मेरे पास पड़ी हुई थी. वो हिचकिचाती हुई आई और पलंग पर से चुनरी उठा कर वापस गैस के पास चली गई.

जब वो चुनरी उठा रही थी तो जाहिर सी बात है उसे झुकना पड़ा होगा तो जैसे ही वो चुनरी उठाने को झुकी मुझे उसकी राइट साइड की चूची के दर्शन हो गए. दोस्तों क्या बताऊँ उस वक्त मेरे लण्ड पर क्या बीती. ना मैं उन चूचियों को छू सकता था ना ही उन्हें देख कर उस वक्त अपना लण्ड मसल सकता था.

जैसे तैसे मैंने कंट्रोल किया और लण्ड को शांत कराने में कामयाब हुआ. कमल नहा चुका था. हम दोनों ने चाय पीई और स्कूल के लिए निकल गए. निकिता दूसरे स्कूल में पढ़ती थी. वो हमेशा हमारे जाने के बाद चाय के बर्तन धो कर स्कूल के लिए निकलती थी.

हाय!! उसके मुलायम हाथ जो बने ही थे लण्ड हिलाने के लिए..उन बेचारों का बर्तन धो-धो कर ना जाने क्या हाल होता होगा. उस साले कमल को क्या बताऊँ कि उसकी बहन कितनी सेक्सी है. उसकी बहन के मुँह को देखकर जी में आता है कि उसके मुँह में मूत दूँ.

बूब्स इतने प्यारे हैं कि उनको मसल-मसल कर पूरी जिंदगी गुजार दूँ. चूची को मुँह में ले कर जोर से काटूं और उसके चिल्लाते ही मुँह में मुँह डालकर घंटों चूमता रहूँ. खैर, बात आई गई हो गयी. मैंने न जाने कितनी बार निकिता के चेहरे को और उसकी चूचियों को याद करके मुठ मारी होगी.

लेकिन हर मुठ के साथ उसे चोदने की तड़प भी उतनी ही बढ़ जाती. ऐसे ही आधा साल गुजर गया. ठण्ड आ गई. हवाओं में एक अजीब तरह की वासना घुल गई. दिन गुजरते रहे. इस बीच मैं रोज कमल को पिक करने जाता रहा और अक्सर ही निकिता के सेक्सी चुदास चेहरे और इस कायनात के सबसे सुंदर बूब्स को देखकर आहें भरता रहा.

मैंने ठान लिया था कि जब भी मुझे मौका मिलेगा इस बहन को लौड़ी को पटक-पटक के चोदूंगा. वो दिन आखिर आ ही गया. हुआ ऐसा कि कमल ने मुझे एक दिन पहले ही बताया कि वो दो-तीन दिन के लिए शहर से बाहर जा रहा है तो अगले दो-तीन दिन मैं उसे पिक करने ना आऊँ. मैंने ठीक है कहा और घर आ गया.

मूतते समय मुझे विचार आया कि कमल बाहर जा रहा है लेकिन निकिता तो घर पे ही रहेगी. मम्मी उस वक्त होंगी नहीं और मेरे लिए यही मौका है कि निकिता की टाँगे उठा कर उसकी चूत का भोसड़ा बना दूँ और उसके बेहद चुदास चेहरे पर मूत की धार बिखेर दूँ.

सोचते ही मेरा मूतता हुआ लौड़ा मूतना छोड़ कर मेरे बनाए हुए प्लान पर मुझे शाबाशी देने लगा और निकिता की याद में आहें भरने लगा. लण्ड को शांत कराने के लिए मुझे निकिता को याद करके मुठ मारनी पड़ी तब जाकर चैन मिला. अगले दिन सुबह मैं कमल के घर पहुँच गया.

मुझे पता था इस वक्त ना कमल घर पे होगा और ना ही उनकी मम्मी. निकिता ने गेट खोला और कसम से वो क्या लग रही थी उस दिन. उसने काले रंग की टाइट सलवार कमीज पहन रखी थी. बूब्स बिल्कुल कसे हुए थे. उसके बाल गीले थे और चेहरे से लेकर गर्दन तक जगह-जगह चिपके हुए थे. इसका मतलब वह नहाकर अभी-अभी बाहर निकली थी.

उसने मुझे देखकर कहा- “भइया ने आपको बताया नहीं?” “क्या?” मैंने पूछा. “वो बाहर गए हैं. दो-तीन दिन बाद आएँगे. मुझे लगा आपको बता दिया होगा उन्होंने.” उसने मुझे अंदर लेते हुए कहा.

मैंने जानबूझकर अनजान बनते हुए कहा- “नहीं. उसने मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं बताया.”

“शायद उनके दिमाग से निकल गया होगा. कोई बात नहीं आप बैठो मैं चाय बता देती हूँ. आप चाय पी कर चले जाना.” उसने कहा और चाय बनाने चली गई.

मैं पलंग पर बैठ गया. निकिता चाय बनाने लगी. जब वो चाय बनाने बैठी तो उसकी सलवार उसकी गांड के नीचे बहुत टाइट होकर दब गई. इतनी टाइट कि गांड के उभार और गांड की दरार को साफ देखा जा सकता था. मैंने गौर किया कि उसनें अंदर पेंटी नहीं पहनी है क्योंकि इतनी टाइट सलवार में से भी उसकी गांड पर पेंटी के आकर का कुछ दिख नहीं रहा था.

अगर उसने पेंटी पहनी होती तो गांड के नीचे दबने से टाइट हुई सलवार के अंदर पेंटी के उभार से ही पता चल जाता कि उसने पेंटी पहनी है. लेकिन उसने पेंटी नहीं पहनी. फिर मैंने अपने दिमाग पर जोर दिया और पाया कि उसने उस दिन ब्रा भी नहीं पहनी थी.

इसका मतलब ये हुआ कि निकिता घर में ब्रा और पेंटी नहीं पहनती और इस वक्त इस सलवार के नीचे उसका बदन पूरा नंगा है. इस ख़याल ने ही मुझ में रोमांच जगा दिया. कुछ ही देर में चाय तैयार हो गई. निकिता चाय लेकर आई.

उसके हाथ से चाय लेते वक्त जानबूझकर मैंने उसके हाथ को कलाई तक छूटे हुए चाय ली और उससे कहा- “तुम भी अपनी चाय ले आओ. दोनों साथ बैठकर चाय पियेंगे.” वो थोड़ी हिचकिचाई और अपनी चाय लेने वापस गैस की तरफ गई.

चाय लेकर वापस लौटते वक्त ना जाने कैसे उसका पैर थोडा स्लिप हो गया और उसके हाथ की चाय उसके बूब्स पर फैल गई. चाय बहुत गरम थी. निकिता फौरन बाथरूम की तरफ दौड़ी और वहां पहुँच कर अपनी सलवार के ऊपर से ही पानी की भरी बाल्टी अपनी छाती पर उड़ेल दी.

इस बीच उसे ये पता ही नहीं चला कि उसने बाथरूम का दरवाजा बंद किए बिना ही बाल्टी का पानी अपने बूब्स पर डाला और सलवार उतार कर हैंगर पर टांग दी. मैं उसे ये सब करते हुए आसानी से देख सकता था क्योंकि पलंग का एंगल ऐसा था कि वहां से बाथरूम साफ दिखता था.

निकिता ने हालांकि सलवार तो उतार दिया था क्योंकि वह गीला हो चुका था लेकिन चेंज करने के लिए वहां कुछ नहीं था और साथ ही इस बीच उसने बाथरूम का दरवाजा भी बंद कर लिया था. कुछ देर बाद मैंने देखा कि निकिता वही सलवार पहने बाथरूम से बाहर आई और वहीं से अंदर वाले रूम में चली गई.

हो न हो वह सलवार बदलने ही उस रूम में गई होगी. मुझे पता था उस रूम का दरवाजा सही से लगता नहीं है. मैंने चाय का कप साइड में रखा और धीरे से उस रूम के दरवाजे तक गया. ये वही मौका था जिसका इतंजार मैंने न जाने कब से किया है और इस मौके को मैं हाथ से जाने नहीं देना चाहता था.

मेरा लण्ड पूरी तरह से खड़ा था. मैंने अपनी पेंट की ज़िप खोली और लण्ड बाहर निकाल दिया. इसके बाद मैंने थोडा जोर लगाया और दरवाजा खुल गया. जिस वक्त दरवाजा खुला निकिता उस वक्त ऊपर से पूरी नंगी थी. उसके गोरे-गोरे बोबों को देखकर मेरे अंदर का शैतान जाग उठा.

उसने मेरी तरफ देखा और देखा कि मैं अपना 6.5 इंच लम्बा लण्ड पेंट की ज़िप से बाहर निकाले उसकी तरफ बढ़ रहा हूँ. निकिता ने अपने दोनों हाथ अपने बूब्स पर रखे ताकि वह उन्हें ढँक सके और साथ ही वह शर्म से पानी-पानी हो रही थी इसी वजह से उसकी निगाहें बिल्कुल नीचे की तरफ थीं.

वह अपने कदम पीछे की ओर बढ़ा रही थी और मैं अपने लण्ड सहित उसकी चूत को चोदने के इरादे से उसकी ओर खिंचा चला जा रहा था. मैं जैसे ही उसके करीब पहुंचा तो वो बोली कि आप मेरे भाई जैसे हो आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते.

तो मैंने कहा कि निकिता मेरी जानेमन तुझे चोदने की ख़्वाहिश ना जाने कब से मेरे दिल में है और तू कह रही है मैं ऐसा नहीं कर सकता. तेरे सेक्सी चुदास चेहरे को याद करके इस लण्ड ने तेरी चूत को रात-रात भर चाहा है. अब चाहे कुछ भी हो जाए तुझे तो मैं चोद कर ही रहूँगा.

निकिता का चेहरा शर्म से लाल हुआ पड़ा था. मैंने उसके परियों जैसे गोरे सेक्सी जिस्म को घूरते हुए अपने लण्ड पर थूक मला और निकिता का नाम लेते हुए लण्ड को रगड़ने लगा. वो शरम से पानी-पानी हो रही थी. फिर मैं उसके थोड़े करीब गया और लण्ड को उसके कपड़े के ऊपर से ही उसकी गांड पर मसलने लगा.

वह पीछे को हटी तो पीछे दीवार आ गई जहाँ मैंने उसे दबोच लिया और उसे अपनी बाहों में भर लिया. वह छूटने की कोशिश करने लगी. लेकिन मैं हैवानों की तरह उसके जिस्म से खेलने लगा. मैंने उसके मुँह में अपना मुँह डाल दिया और बहुत बुरी तरह उसे चूमने लगा.

कभी उसकी जीभ चूमता तो कभी उसके मुँह में थूक देता और उस थूक को उसके चेहरे पर मलता. वह रोने लग गई थी. उसका रोता हुआ चेहरा मुझे और भी सेक्सी लग रहा था. उसके चेहरे को उसके नंगे बूब्स सहित देखना मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा लग रहा था.

मुझे बहुत तेज मूत आ रहा था. सोचा बाथरूम में मूतने जाऊंगा उससे अच्छा यहीं मूत देता हूँ. मैंने उसे घुटनों के बल बैठाया और उसके चेहरे पर मूत की गर्म धार छोड़ दी. वह इधर-उधर चेहरा घुमाने लगी लेकिन मैंने उसका चेहरा सख्ती से पकड़ कर लण्ड की तरफ कर दिया और मूत से उसके पूरे चेहरे को नहलाया.

फिर मैंने उसे खड़ा किया और उसके मुँह पर थूक कर उसे किस करने लगा. उसके गुलाबी होंठों पर मैने अपने होंठ रखे और उन्हें तब तक चूसता रहा जब तक कि उसके होंठों का सारा रस मैंने पी नहीं लिया. फिर मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और उसे पूरी तरह नंगा करके खुद भी नंगा हो गया.

नंगी निकिता बेहद खूबसूरत लग रही थी. मुझे निकिता की गांड चाटनी थी. मैं नीचे झुका और उसकी गांड की छेद में अपनी जीभ घुसा दी. वह कसमसाने लगी और मुझे खुद से दूर करने के लिए हाथ से धक्के मारने लगी. इसी जोर-आजमाइश और गांड चटाई में उसकी पाद निकल गई. इस वक्त मेरा मुँह उसकी गांड में ही था.

उसकी पाद ने मेरी वासना को और भड़का दिया. मैंने उसकी तरफ वासना भरी निगाहों से देखा और मुस्कुराने लगा जिस पर उसने अपना मुँह फेर लिया और रोने लग गई. फिर मैं उसे गोद में उठाकर हॉल वाले कमरे में लाया जहाँ बेड था और वहां लाकर मैंने उसे बेड पर पटक दिया.

इसके बाद मैं अपने लण्ड सहित उसके मखमली कोमल जिस्म का रस पीने उसके ऊपर चढ़ गया. वह अभी भी रो रही थी और मेरी हर हरकत का विरोध कर रही थी. मैंने उसके मुँह में जबरदस्ती अपना लण्ड घुसा दिया और उसे अंदर बाहर करने लगा. निकिता मुझे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करती रही लेकिन कामयाब नहीं हुई.

उफ़्फ़!! उसके सुर्ख गुलाबी होंठों के दरमियान मेरा काला लंबा लण्ड क्या सेक्सी लग रहा था. फिर मैं धीरे-धीरे उसके गोरे चुदास शरीर के नीचे की तरफ बढ़ा. उसके हिमालय से बड़े बूब्स को मुँह में लेकर बच्चों की तरह चूसने लगा और उसकी चूचियों को अपने दांत से काटने लगा.

इस वक्त तक उसका विरोध थोडा कम हो गया. फिर मैं उसकी चूत पर लपका और उसकी चूत को अंदर तक जीभ डालकर चाटने लगा. अब निकिता भी पूरी तरह मस्त हो चुकी थी. वो आहें भरने लगी. उसने अपनी टाँगे फैला दीं और मेरे बाल पकड़ कर प्लीज भइया मेरी चूत को खा जाओ मेरी चूत फाड़ दो कहने लगी.

मैंने उससे कहा मैं लेटता हूँ तू मेरे ऊपर आ कर मेरे लण्ड पर मूत तभी तुझे चोदूंगा. वो मेरे ऊपर आई और मेरे लण्ड पर अपनी चूत के दोनों किनारे उँगलियों से फैलाते हुए मूतने लगी. हाय!! नंगी निकिता मेरे लण्ड पर मूतते हुए सेक्स की देवी लग रही थी.

सेक्स की देवी निकिता को मैंने कहा तू मेरे मुँह में थूक तो उसने मेरे मुँह में अपने मुँह से निकला थूक रुपी अमृत थूक दिया फिर मैंने भी उसके मुँह में थूका और इसके बाद करीब बीस मिनिट तक हम दोनों नंगे एक दूसरे से लिपटे हुए एक दूसरे को चूमते रहे.

फिर मैंने निकिता को बेड पर लेटा कर पूछा कि बता क्या किया जाए तेरे इन फुटबॉल जैसे बोबों का और तेरी बेहद सुंदर झांट वाली डबलरोटी जैसी चूत का तो बोली कि मुझे इतना चोदो कि चूत से खून निकलने लगे और मेरे बोबों को मसल-मसल कर इतना बड़ा कर दो कि सड़क पे चलने वाला हर एक आदमी उन्हें पीने की ख़्वाहिश करे.

मैंने उससे पूछा कि जानेमन एक बात बताओ तुम अंदर ब्रा और पेंटी क्यों नहीं पहनती तो वो बोली कि मुझे अपने बूब्स और चूत को कैद में रखना पसंद नहीं है…मेरा बस चले तो मैं सब जगह नंगी ही रहूँ. वाह!! क्या सोच थी. निकिता…मेरी जानेमन.

इसके बाद मैंने उसकी चूत पर ढेर सारा थूक लगाया और एक ही झटके में लण्ड उसकी चूत के अंदर घुसा दिया. वह चिल्लाई लेकिन इतना नहीं जितना कोई लड़की पहली बार लण्ड लेने पर चिल्लाती है. इससे मुझे इतना तो अंदाजा हो गया कि ये बहन की लवडी इससे पहले भी अपनी चूत में बंबू ले चुकी है.

मैं लण्ड उसकी चूत में अंदर-बाहर करने लगा. वो सिसकियाँ भरने लगी. आहहह हर्ष भइया…चोदो मुझे…आपका लण्ड कितना गरम है…हाय!! मैं मर जाउंगी..अईईईई आहह..प्लीज फक मी हार्ड भइया. उसकी सेक्सी बातें सुनकर मेरा जोश और बढ़ गया और मैंने उसे बुलेट ट्रेन की रफ़्तार से चोदना चालू कर दिया.

निकिता पागल होने लगी. सच बताऊँ दोस्तों, उसकी चूत बहुत ज्यादा ही प्यारी थी. मुझे उसकी डबलरोटी जैसी सुर्ख गुलाबी चूत से प्यार हो गया था. मैं उसे चोदे जा रहा था और गालियां देते हुए उसकी गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था.

“हाय मेरी जानेमन निकिता!! मेरे लण्ड की रानी!! मेरी जानू मेरी रंडी!! मेरे दोस्त की चुदक्कड़ बहन!! मेरी सेक्स की देवी आ तेरी चूत को मेरे लण्ड समान फावड़े से खोद कर उसे खाई बना दूँ. बहन की लबड़ी निकिता!! हाय तेरे बूब्स, तेरी चूत, तेरा चेहरा उफ़्फ़!! आ तेरे चेहरे पर मूत कर उसे और गोरा बना दूँ मेरी जानेमन.” माहौल बहुत सेक्सी हो गया था.

निकिता और मैं एक दूसरे के चुदासे शरीर का भरपूर मजा ले रहे थे. निकिता उछल-उछल कर अपनी चूत मरवा रही थी और मैं पूरे जोश में उसे गाली लेते हुए, उसके चेहरे पर थूकते हुए, उसे किस करते हुए और उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए ठपा-ठप-ठपा-ठप चोदे जा रहा था.

पूरे कमरे में हम दोनों की सिसकियों और चूत-लण्ड की रगड़न से उठती छप-छप की आवाज के अलाबा कुछ नहीं था. मैं झड़ने वाला था. मैंने निकिता की चूत से लण्ड बाहर निकाला और सारा माल उसके सेक्सी चिकने पेट पर उड़ेल दिया. हाय!! क्या माल लग रही थी निकिता.

पूरी नंगी निकिता और उसके पेट पर पड़ा मेरा गाढ़ा सफेद वीर्य. आज आखिर मेरे सपनों की रानी, मेरी सेक्स की देवी, मेरी रंडी निकिता को मैंने चोद ही दिया और उसकी चूत का भोसड़ा बना ही दिया. इसके बाद हमने शाम के 4 बजे तक चुदाई की और उसकी मम्मी के आने के कुछ देर पहले मैं वहां से चला गया.

फिर हमने अगले दो दिन तक जब तक कमल नहीं आ गया खूब चुदाई का खेल खेला और एक दूसरे की जबानी का खूब मजा लूटा. इन दो दिनों में मैंने निकिता को अपनी रंडी बनाकर रखा और उसकी गांड भी खूब मारी. सचमें, मनपसंद चूत मिलने का मजा ही कुछ और है.

तो दोस्तों ये थी मेरी कहानी जिसमें मैंने अपने दोस्त की सेक्सी बहन को पटक-पटक कर चोदा.