चची की चूत मारने का सुख

चची की चुदाई मेरी इस कहानी में आपका स्वागत है. यह कहानी मेरी पहली कहानी है.
मेरी चची की हाइट 5’5″ है, गोरा रंग फिगर, 36-28-34 है, गांड बहुत बड़ी… कोई भी देखे तो चची की गांड मारने की ही सोचेगा. चची के चूचे काफी बड़े और गोल गोल हैं. चची की एक बेटी 6 साल की… मेरे चाचा विदेश मे जॉब करते हैं तो साल में एक बार दो हफ्ते के लिए आते हैं, चची गाँव में मेरे दादा दादी के साथ रहती है. हमारा गाँव पुणे के पास है.

मेरा नाम अरहान है, मैं 22 साल का हूँ, मेरा कद 6′ है, पुणे से अपनी पढ़ाई पूरी करके मैं अभी मुंबई में जॉब कर रहा हूँ. मैं अपने एक कलीग के साथ एक रूम शेयर करके रह रहा हूँ.

बात उन दिनों की है जब मैं पुणे से पढ़ाई कर रहा था तब अचानक एक दिन मुझे चची का फोन आया- मैं कल पुणे आ रही हूँ.
मैं हैरान हो गया, मैंने पूछा- क्यों आ रहे हो?
तो चची ने कहा- लड़की को डॉक्टर के पास दिखाना है.
तो मैं खुश हुआ, मेरे दिमाग़ में एक से एक प्लान बन रहे थे कि मैं कैसे चोदूं चची को… क्योंकि चची की चूत चुदाई की मेरी इच्छा काफी पहले से थी और जब भी मैं गाँव जाता था तो चची मेरा अच्छा ख्याल रखती थी तो मैं सोचता था कि चची शायद अपनी प्यासी जवानी मेरे से संतुष्ट करवाना चाहती हों लेकिन शर्म के कारण पहल ना कर पाती हों…

दूसरे दिन दोपहर एक बजे मैं चची को बस स्टैंड लेने गया बाइक पर… मैंने पहले ही एक होटल में रूम बुक कर लिया था, उधर लेकर गया चची को… उनको बोला- आप शाम तक आराम करो, मैं शाम को आऊंगा डॉक्टर के पास लेकर जाने के लिए. मैं शाम को 6 बजे बाईक पर उनको लेने गया, उनकी लड़की मेरे आगे और चची मेरे पीछे बैठी, उनके बूब्स बार बार मेरी पीठ पर लग रहे थे, मेरी हालत खराब हो रही थी.

डॉक्टर को दिखाने के बाद हमने एक रेस्तरां में खाना खाया और फिर मैंने चची को होटल छोड़ा और बोला- मैं कल सुबह आऊँगा!
तो चची डर कर बोली- नहीं, तुम यहीं रूको… मुझे इधर का कुछ मालूम नहीं है!
उनकी बेटी भी सो गई थी. मैं अंदर ही अंदर बहुत खुश हुआ, मैं बोला- ठीक है, मैं मेरे रूम से नाइट ड्रेस पहन कर आता हूँ.

मैं नीचे आया और बाइक चालू करके सीधा मेडिकल गया और कंडोम और वियाग्रा टॅबलेट ली, जनरल स्टोर में जाकर थम्स अप की एक बोतल ली, रूम में आकर कपड़े बदले.
मैंने रास्ते में जाते जाते आधी बोतल पी ली और बाकी आधी में 1 वियाग्रा की टॅबलेट डाल कर मिक्स किया और वापिस होटल पहुँच कर रूम का डोर नॉक किया.

चची ने दरवाज़ा खोला तो मैंने देखा कि चची नाइट ड्रेस पहन कर सामने खड़ी थी रेड कलर की… चची बहुत सेक्सी लग रही थी, बूब्स तो काफी उभरे दिख रहे थे. पीछे घूमने के बाद उनकी पेंटी का शेप देख कर मेरी हालत खराब हुई जा रही थी. ऐसा लगा कि पीछे जाकर पकड़ कर सीधा लंड उनकी गांड में घुसा दूँ!

मैंने चची को बोला- ये लो थम्स अप पियो.
मैंने पहले देख लिया था कि गोली पूरी घुल गई थी.

बॉटल उनके हाथ में दी, चची ने पीनी शुरू की, तब तक मैं किचन से पानी पी कर बाहर आया और देखा तो चची ने काफी ड्रिंक पी ली थी और टीवी चालू करके देख रही थी.
उनकी बेटी बेड के कोने मे जाकर सोई थी तो मैं चची के बाजू में जाकर ऐसे ही लेट गया और उनको बोला- मैं सो रहा हूँ..

उनको गोली का असर अभी तक हुआ नहीं था, मैं आँख बंद करके लेटा था.
कुछ 20 मिनट बाद चची उठी और टीवी बंद किया. मैं चची की गांड, चूत और चूचों की कल्पना कर रहा था तो मेरा लंड टाइट हो चुका था.
उन्होंने टीवी बंद करके मुझे आवाज़ दी, मैं कुछ न बोला… थोड़ी सी आँख खोल कर देखा तो चची ने अपनी चूत पर हाथ रखा, फिर आकर मुझे हिलाया, फिर भी मैंने कुछ रेस्पॉन्स न दिया.

चची कन्फर्म कर रही थी कि मैं सोया हूँ या नहीं फिर उन्होंने मेरे टाइट लंड की तरफ देख कर अपने बूब्स और चूत पर हाथ घुमाया और हल्का सा हाथ मेरे लंड पर रखा.

फिर चची आकर मेरी बगल में लेट गई और अपनी चूत पर हाथ फिरा रही थी, उनको समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें! उनकी चूत इतनी प्यासी हो रही थी कि कुछ भी मिलेगा, उसे वो अपनी प्यासी फुदी में घुसा लें.

थोड़ी देर बाद चची ने अचानक मेरे लंड पर हाथ रखा और अपनी नाईटी ऊपर करके अपनी चूत में उंगली डालने लगी.
अब मैंने सोचा कि यह सही टाइम है उठने का… मैं उठा तो चची डर गई और नाईटी नीचे करने लगी.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो बोली- पेट दर्द कर रहा है…
तो मैं बोला- फिर आप हाथ मेरे ऊपर क्यों हाथ फिरा रही थी?

चची डर गई और रोने लगी तो मैंने उनको गले से लगाया और आहिस्ता से उनके बूब्स पर हाथ रखा.
वो कुछ बोली नहीं, मैंने उनके मुंह को पकड़ा और सीधा स्मूच किया, उनके पिंक लिप्स को चूसा 5 मिनट… फिर चूचों को दबाया, फिर नाईटी उतार कर चूचों को चूसा. उनके निप्पल बहुत बड़े थे, उनको चूस चूस कर लाल किया.
वो मोनिंग कर रही ‘और ज़ोर से… ज़ोर से…’

फिर मैं नीचे आया और पेंटी निकाली तो देखा एकदम क्लीन और पिंक चूत… मैं सीधा चूसने लगा, ज़ोर ज़ोर से काटने लगा, चची तड़प रही थी.
दस मिनट चूसने के बाद चची बोली- मैं आने वाली हूँ.
और बहुत जोर से उम्म्ह… अहह… हय… याह… करती हुई झड़ गई.

फिर मैंने देर नहीं लगाई अपना लंड निकाल कर सीधे चची की चूत पर रख कर घुसा दिया. गीली चूत में मेरा लंड ऐसे घुसा जैसे ताजे माखन में चम्मच…
दस मिनट तक चची को चोदा और मैं चची की चूत के अंदर ही झड़ गया.
इसके बाद हम दोनों सो गए.

सुबह को जब मैं जागा तो देखा चची पूरी नंगी बेसुध सो रही हैं… मैंने चची को जगाया तो वो खुद को नंगी पाकर एकदम से शर्मा गई और झट से अपनी नाईटी उठा कर पहनने लगी.
चची मुझसे नजर नहीं मिला पा रही थी.
इसके बाद चची कई बार बेटी को डॉक्टर को दिखाने लाई, हर बार हमने ऐसे ही होटल में रात बिताई और जम कर चुदाई की.

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